विराम चिन्ह किसे कहते है तथा यह कितने प्रकार के होते है।

विरामचिह्न (Punctuation Mark) कीपरिभाषा – 

 जबकिसीवाक्यकोलिखाजाताहैतोउसकेमध्ययाअंतमेंजिनचिन्होकाप्रयोगकियाजाताहैवहचिन्हविरामचिन्हकहलातेहै। विराम चिन्हो का प्रयोग करने से इस बात का पता चलता है की कौन से वाक्य को किस प्रकार से पढ़ना है और उस वाक्य का सही अर्थ क्या होगा। 

दुसरे शब्दों में कहें तो – जब किसी वाक्य में हम अपने भावों का अर्थ स्पष्ट करने की चेष्टा करते है या किसी विचार और उसके प्रसंगो को व्यक्त करने के लिए हम रुकते है, तो इसे विराम कहा जाता है और इन विरामो को व्यक्त करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें ही विराम चिन्ह कहा जाता है। 

विरामशब्दकाअर्थ होता है रुकना या ठहरना अत: वाक्यों को बोलते समय या पढ़ते समय बीच में रुकना पड़ता है, जिससे भाषा स्पष्ट व अर्थपूर्ण होती है और यहीं पर विराम चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। 

यदि इन विराम चिन्हों का सही स्थान पर प्रयोग न किया जाये तो वाक्यों का अर्थ बिलकुल ही बदल जायेगा और वाक्यों को अशुद्ध माना जायेगा जैसे – 

1. देखोमतचलेजाओ। 

2. देखो, मतचलेजाओ। 

3. देखोमत, चलेजाओ। 

उपर्युक्त उदाहरणों में विराम चिन्हों के बिना और विराम चिन्हों के साथ प्रयोग किये गए वाक्यों का अर्थ कुछ इस प्रकार निकलता है – 

1. देखोमतचलेजाओ – इस वाक्य में किसी भी प्रकार के चिन्ह का प्रयोग नहीं किया गया जिस कारण से इस वाक्य का सही अर्थ स्पष्ट नहीं हो रहा है, क्यूंकि इस वाक्य में दो कार्य एक साथ करने को कहे गए है जिस कारण विराम चिन्ह का लगना अनिवार्य है। इस वाक्य से यह प्रतीत होता है कि किसी को जल्दी जल्दी में जाने को बोला जा रहा है। 

2. देखो, मतचलेजाओ – इस वाक्य में विराम चिन्ह का प्रयोग वाक्य के शुरू होते ही किया गया है लेकिन वाक्य का अर्थ सही से समझने के लिए आपको इसे ध्यान से पढ़ना होगा क्यूंकि इस वाक्य का अर्थ है “मत जाओ” लेकिन पहली बार इस वाक्य को पढ़ने पर ये प्रतीत हो रहा था की यह बोल रहा है की ‘चले जाओ” लेकिन विराम अल्पविराम के प्रयोग से इसका अर्थ ही बदल गया। 

इस वाक्य में पहले ‘देखने’ को बोला जा रहा है और फिर ‘मत जाओ’ बोला गया है। इस वाक्य से यह प्रतीत होता है कि कोई कहीं जा रहा है और उसे भावनात्मक रूप से ‘ न जाने’ को कहा जा रहा है। 

3. देखोमत, चलेजाओ – इस वाक्य में अल्पविराम का प्रयोग वाक्य के मध्य में किया गया है जिससे इस तीसरे वाक्य का अर्थ दूसरे वाक्य से बिलकुल भिन्न हो गया है। इस वाक्य में कहा जा रहा है की “देखो मत” और यहाँ से “चले जाओ” 

इस वाक्य को पढ़ने से ऐसा प्रतीत होता है कि कोई सामने वाले को देख रहा है या कोई अन्य वस्तु देख रहा है और वह सामने वाला उसे कह रहा है कि ” देखो मत, चले जाओ। जैसे –  उस कार को देखो मत, चले जाओ, नहीं तो बीएस छूट जाएगी। 

उपर्युक्त दिए गए तीनो उदाहरणों के आधार पर हम कह सकते है कि अगर विराम चिन्हो का सही तरह से सही जगह प्रयोग न किया जाये तो वाक्यों का अर्थ बिलकुल ही बदल जाता है और उस वाक्य को समझना कठिन हो जाता है, इसलिए विराम चिन्हो का सही से इस्तेमाल करना आना चाहिए। 

हिंदीमेंप्रचलितप्रमुखविरामचिह्ननिम्नलिखितहै– 

(1) अल्पविराम (Comma)( , ) 

(2) अर्द्धविराम (Semi colon) ( ; ) 

(3) पूर्णविराम(Full-Stop) (

(4) उपविराम (Colon) [ : ] 

(5) विस्मयादिबोधकचिह्न (Sign of Interjection)( ! ) 

(6) प्रश्नवाचकचिह्न (Question mark) ( ? ) 

(7) कोष्ठक (Bracket) ( () ) 

(8) योजकचिह्न (Hyphen) ( – ) 

(9) अवतरणचिह्नयाउद्धरणचिह्न (Inverted Comma) ( ”… ” ) 

(10) लाघवचिह्न (Abbreviation sign) ( o ) 

(11) आदेशचिह्न (Sign of following) ( :- ) 

(12) रेखांकनचिह्न (Underline) (_) 

(13) लोपचिह्न (Mark of Omission)(…)

(1) अल्पविराम (Comma)( , ) – अल्पविराम शब्द दो शब्दों के जोड़ से बना है – अल्प + विराम। जिसमे “अल्प” का अर्थ होता है “थोड़ा’ और” विराम” का अर्थ होता है ‘रुकना’ अर्थात जब किसी वाक्य में थोड़ा बहुत ठहराव करना हो तो अल्पविराम का इस्तेमाल किया जाता है जैसे – 

1. जब एक से अधिक संज्ञाओं को एक ही वाक्य में लगातार प्रयोग किया जाता है तो वहां पर भी अल्पविराम का प्रयोग होता है। 

जैसे – हिमाचल प्रदेश में शिमला, धर्मशाला, चम्बा, कुल्लू, मनाली आदि स्थान घूमने के लिए बहुत बढ़िया है। 

2. जब किसी सवांद को लिखा जाता है तो वहां पर भी अल्पविराम-चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। 

जैसे – राकेश ने दुकानदार को कहा,  ”तुम मुझे पानी दो, मैं तुम्हें पैसे दूँगा।”

3. जब किसी सवांद का लेखन किया जाता है तो वहां पर “हाँ” और “नहीं” के साथ भी भी अल्पविराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। 

जैसे – राकेश : राहुल, तुम कल स्कूल जाओगे?

राहुल : हाँ, मै जाऊंगा। क्या तुम जाओगे?

राकेश : नहीं, मैं परसो जाऊंगा। 

अल्पविरामकेकुछमुख्यनियमइसप्रकारहैं– 

1. जब किसी वाक्य में शब्दों को दो या उससे अधिक बार दोहराया जाता है तो अल्पविराम का प्रयोग होता है। 

2. वाक्य में जिस स्थान पर किसी व्यक्ति को सम्बोधित किया जाये वहां भी अल्पविराम लगाया जाता है। 

3. वाक्य में किसी व्यक्ति द्वार कही बात को बताने से पहले भी अल्पविराम का इस्तेमाल किया जाता है। 

4. जिन वाक्यों का  बस, हाँ, नहीं, सचमुच, अतः, वस्तुतः, अच्छा – जैसे शब्दों से आरम्भ हो वहां पर भी अल्पविराम का इस्तेमाल किया जाता है। 

5. वाक्य में तारीख के साथ महीने का नाम लिखने के बाद तथा सन्, संवत् के पहले अल्पविराम का प्रयोग किया जाता है। 

6. अंको को लिखते समय भी अल्पविराम का प्रयोग किया जाता है। जैसे- 5, 6, 7, 8, 9, 10, 15, 20, 60, 70, 100 आदि।

(2) अर्द्धविराम (Semi colon) ( ; ) – जब किसी वाक्य में अल्पविराम से अधिक ठहराव दिखाना हो और पूर्णविराम से कम तो वहां अर्द्धविराम का इस्तेमाल किया जाता है। दो उपवाक्यों को जोड़ने वाले चिन्ह को अर्द्धविराम कहा जाता है जैसे – 

वह एक अच्छा छात्र है ; ऐसा उसके अध्यापक मानते है। 

चोर उसकी चैन उड़ा ले गए ; किसी ने कुछ नहीं कहा। 

दुकान बंद है ; कारोबार ठप है ; बेकारी फैली है ; उसके घरमे हाहाकार है।

कल रविवार है; छुट्टी का दिन है; आराम मिलेगा।

(3) पूर्णविराम(Full-Stop) ( ) – जब कोई वाक्य पूरा हो जाता है तो उसके बाद पूर्णविराम चिन्ह लगाया जाता है। पूर्णविराम का प्रयोग वाक्य की शुरुआत में या मध्य में नहीं किया जा सकता पूर्णविराम का प्रयोग किसी भी वाक्य में अंत में किया जाता है। पूर्णविराम का अर्थ होता है की अब इस वाक्य पर पूरी तरह से विराम है और अगले वाक्य को अल्पविराम और अर्धविराम से अधिक ठहराब के साथ पढ़ा जायेगा। 

पूर्णविरामकेउदहारण – कल मैं स्कूल जा रहा था। वहां पर कुछ लड़के, लड़किओं को छेड़ रहे थे। और उन्हें कोई कुछ नहीं बोल रहा था। क्यूंकि वह अमीर लोग है ; सब ऐसा मानते है। जबकि मुझे लगता है वह गलत था। 

पूर्णविरामकादुष्प्रयोग– 

पूर्णविराम के प्रयोग में सावधानी न रखने के कारण वाक्य का अर्थ बदल सकता है इसलिए निम्रलिखित उदाहरण में अल्पविराम लगाया गया है- 

आप मुझे नहीं पहचानते, महीने में दो ही घर पर रहता हूँ। 

यहाँ ‘पहचानते’ के बाद अल्पविराम के स्थान पर पूर्णविराम का चिह्न लगाना चाहिए, क्योंकि यहाँ पिछले वाक्य (आप मुझे नहीं पहचानते) पूरा हो गया है। यहाँ दूसरा वाक्य पहले से बिलकुल स्वतंत्र है।

(4) उपविराम (Colon) [ : ] – जब वाक्य पूरा नहीं होता, बल्कि किसी अन्य वस्तु की के बारे में बताया जाता है, तो वहां पर उपविराम चिन्ह का को प्रयोग में लाया जाता है जैसे – भगवान शिव के अनेक नाम है : शम्भु, महादेव आदि। 

(5) विस्मयादिबोधकचिह्न (Sign of Interjection)( ! ) – जब किसी वाक्य में हर्ष, विवाद, विस्मय, घृणा, आश्रर्य, करुणा, भय इत्यादि का बोध करवाना हो वाक्य में इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे – 

वाह ! आपके हाथ का खाना तो बहुत स्वादिष्ट है। 

ओह ! वो बेचारा परीक्षा में फ़ैल हो गया। 

(6) प्रश्नवाचकचिह्न (Question mark) ( ? ) – जब किसी वाक्य में किसी प्रकार का प्रश्न पूछा जाता है तो, वहां पर प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग किया जाता है जैसे – आप कहाँ जा रहे हो? 

आप हिमाचल से कब आए?

इस चिह्न का प्रयोग वाक्य में संदेह प्रकट करने के लिए भी उपयोग किया जाता है; जैसे- क्या कहा, वह आलसी (?) है।

(7) कोष्ठक (Bracket) ( () ) –  जब किसी वाक्य के बीच ऐसे शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसका एक और अर्थ है तो वहां पर कोष्ठक के मध्य उस शब्द का दूसरा अर्थ लिखा जाता है। जैसे – हिंदी के विद्यार्थी को शुद्ध (स्पष्ट) हिंदी बोलनी आनी चाहिए। 

(8) योजकचिह्न (Hyphen) ( – ) – दो शब्दों के मध्य के संबंध को पर्दर्शित करने के लिए योजक चिन्ह का इस्तेमाल किया जाता है। हिंदी में अल्पविराम के बाद योजक चिह्न का प्रयोग सबसे अधिक होता है।

योजकचिह्नकाउदहारण – उसके माता-पिता उसे अपना सुख-दुःख का साथी मानते है। 

सम्पूर्ण भारत वासिओं को आपस में प्रेम-भाव से रहना चाहिए। 

(9) अवतरणचिह्न (Inverted Comma) ( ”… ” ) – किसी के द्वारा कही गई बात का उसी तरह से लेखन करने के लिए अवतरण चिह्न का प्रयोग किया जाता है जैसे – श्री कृष्ण ने कहा है, “कर्म करते जाओ, फल की चिंता मत करो।”

(10) लाघवचिह्न (Abbreviation sign) ( o ) – जब किसी प्रसिद्ध शब्द या किसी बड़े शब्द को लिखा जाता है तो उसके आगे शून्य लगा दिया जाता है, उस शून्य को ही लाघव चिन्ह कहा जाता है। 

जैसे – 

डॉंक़्टर का लाघव-चिह् – डॉंo

प्रोफेसर का लाघव-चिह्न – प्रो०

(11) आदेशचिह्न (Sign of following) ( :- ) –  जब किसी विषय क्रम को लिखना होता है तो विषय-क्रम व्यक्त करने से पहले आदेश चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे – लिंग के दो भेद है :- (1) स्त्रीलिंग (2) पुल्लिंग। 

(12) रेखांकनचिह्न (Underline) (_) –  रेखांकन चिह्न का प्रयोग किसी विशेष वाक्य या शब्द को रेखांकित करने लिए किया जाता है जैसे कि निचे का पूरा वाक्य ही विशेष है इसलिए उसके निचे रेखांकन चिह्न लगाया गया है – 

मुझेअपनेदेशपरगर्वहै। 

(13) लोपचिह्न (Mark of Omission)(…) – वाक्य या अनुच्छेद (पैराग्राफ) में जब थोड़े अंश (शब्दों) को छोड़कर लिखना हो तो लोप चिन्ह का इस्तेमाल इस्तेमाल किया जाता है। जैसे – रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा है, ”परीक्षा की घड़ी आ गई है …. हम करेंगे या मरेंगे” ।

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