वंदे मातरम History, Writer, Lyrics, Meaning in Hindi

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वंदे मातरम हमारे देश का राष्ट्रय गीत है, इस गीत के लिए हमारे दिलों में एक अलग इज़्ज़त है और इस गीत को सुनते ही पथ्थर दिल इंसान में भी देश के लिए प्रेम जाग जाता है। जब यह गीत लिखा गया था उस समय काल में लग भग सब लोगों को संस्क्रत आती थी और इसीलिए लिए इस गीत का अर्थ समझने में लोगों को दिक्कत नहीं आती थी। लेकिन आज के ज़माने में ऐसे बहुत कम लोग हैं जिन्हें संस्क्रत समझ आती है। इसलिए आज हम आप को बताएँगे वंदेमातरम History, Writer, Lyrics, Meaning in Hindi। सँस्कृत के इस गीत का हिंदी अर्थ जानने के साथ-साथ हम बात करेंगे कि “वंदे मातरम” गीत किस ने लिखा, इस गीत का इतिहास क्या है वगैरह। तो चलिए शुरू करते हैं।

Vande Mataram Lyrics\ वंदे मातरम बोल

वन्दे मातरम्!

सुजलां सुफलां मलयजशीतलां

शस्यश्यामलां मातरम्!

शुभ-ज्योत्सना-पुलकित-यामिनीम्

फुल्ल-कुसुमित-द्रमुदल शोभिनीम्

सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम्

सुखदां वरदां मातरम्!

सन्तकोटिकंठ-कलकल-निनादकराले

द्विसप्तकोटि भुजैर्धृतखरकरबाले

अबला केनो माँ एतो बले।

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं

रिपुदल वारिणीं मातरम्!

तुमि विद्या तुमि धर्म

तुमि हरि तुमि कर्म

त्वम् हि प्राणाः शरीरे।

बाहुते तुमि मा शक्ति

हृदये तुमि मा भक्ति

तोमारइ प्रतिमा गड़ि मंदिरें-मंदिरे।

त्वं हि दूर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमल-दल विहारिणी

वाणी विद्यादायिनी नवामि त्वां

नवामि कमलाम् अमलां अतुलाम्

सुजलां सुफलां मातरम्!

वन्दे मातरम्!

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम

धमरणीं भरणीम् मातरम्।

Vande Matram meaning in hindi \ वन्देमातरम्हिंदीअर्थ

मेरी माँ मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ,

मीठे फलों वाली माँ, साफ़ पानी वाली माँ

खुशबूदार हवा वाली माँ

हरे भरे मैदानों वाली, खेतों वाली मेरी माँ

सुकून देने वाली चाँदनी भरी रातों वाली,

खिलते हुए प्यारे-प्यारे फूलों वाली, घने पेड़ों वाली

मीठी-मीठी बाली वाली,

सब को ख़ुशियाँ देने वाली मेरी प्यारी माँ।

गूँजती है आवाज़ें 30 करोड़ जोशीली कण्ठों की 

अपने बाज़ुओं में धारण कर रखा है तूने 60 करोड़ तलवारों को

ए माँ तेरे पास इतनी शक्तियाँ है फिर भी क्या तू कमज़ोर है

ए माँ तू ही हमारी हिम्मत है तू ही हमारी शक्ति है

मेरी माँ मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ,

ए माँ तू ही मेरा ज्ञान है, तुझे मैं अपना धर्म मानता हूँ 

तू ही मेरी आत्मा है, लक्ष्य भी तू ही तो है मेरा

मेरी जान भी तू ही तो है,

मेरी अंदर की अच्छाई भी तू, सच भी तू 

मेरी लिए सारे मंदिर भी तू ही है।

तू ही दुर्गा दश सशस्त्र भुजाओं वाली,

तू शक्तिशाली दुर्गा माँ है 

तू बहार है सेकड़ों कमल के फूलों की

तेरे बिना सब अधूरे हैं,  तू गंगा है ज्ञान की

जो तेरे दासों के दास हैं, मैं उन का भी दास हूँ

मीठे फलों वाली माँ, साफ़ पानी वाली माँ

मेरी माँ मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ।

Writer of Vande Matram \ वंदेमातरमकिसनेलिखाथा

वंदे मातरम गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। बंकिमचंद्र एक अद्भुत लेखक थे और बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका पहला प्रकाशित काम बंगाली में नहीं बल्कि अंग्रेज़ी में था, जिस का नाम ‘राजमोहन्स वाइफ़’ था। बंगला में बंकिमचंद्र का पहला काम ‘दुर्गशानंदिनी’ था जो मार्च 1865 में प्रकाशित हुआ था । 

‘दुर्गेशानंदिनी’ एक उपन्यास था लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली प्रतिभा कविता लेखन के क्षेत्र में है और उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया। कई महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों की रचना करने वाले बंकिम की शिक्षा हुगली कॉलेज और प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। उन्होंने 1857 में बीए और 1869 में कानून की डिग्री हासिल की। अपने पिता की तरह उन्होंने भी कई उच्च सरकारी पदों पर कार्य किया और 1891 में सरकारी सेवा से रिटायर हुए। उन्होंने ग्यारह वर्ष की आयु में विवाह किया और कुछ वर्ष बाद उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उन्होंने देवी राजलक्ष्मी से पुनर्विवाह किया और उन से उनकी तीन बेटियां हुई थीं। 

दुर्गेशानंदिनी 1865 में प्रकाशित हुई थी लेकिन उस समय ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी लेकिन उसी जे अगले वर्ष 1866 में उन्होंने कपालकुंड को अगला उपन्यास लिखा जो बहुत लोकप्रिय हुआ। अप्रैल 1872 में, उन्होंने बंगदर्शन नामक एक पत्रिका प्रकाशित करना शुरू किया, जिसमें उन्होंने गंभीर साहित्यिक-सामाजिक और सांस्कृतिक प्रश्न प्रस्तुत किए। यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था कियूंकि इससे पहले उन्होंने रोमांटिक साहित्य ही लिखा था।रामकृष्ण परमहंस के समकालीन बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और उनके करीबी दोस्त ने आनंद मठ का निर्माण किया, जिसमें बाद में वंदे मातरम शामिल किया गया, जो पूरे देश में राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया।

 वंदे मातरम की धुन रवींद्रनाथ ठाकुर ने तैयार करी थी।अप्रैल 1894 में बंकिमचंद्र की मृत्यु हो गई, और 12 साल बाद, जब क्रांतिकारी बिपिनचंद्र पाले ने राजनीतिक पत्रिकाओं का प्रकाशन शुरू किया, तो उन्होंने उस का नाम बदलकर वंदे मातरम कर लिया। लाला लाजपत राय ने इसी नाम की एक राष्ट्रवादी पत्रिका प्रकाशित करना पहले ही शुरू कर दिया था । अत्यंत प्रतिभाशाली राष्ट्रवादी लेखक  बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय एक मजाकिया व्यक्ति के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने ‘कमलकांत ऑफिस’ जैसी व्यंग्य रचनाएं भी लिखीं।

History of Vande Mataram \ वंदेमातरमकाइतिहास

वंदे मातरम को 7 नवंबर 1876 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी में कंठल पाड़ा में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के निवास पर बनाया गया था, जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि उस समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था। ऐसी परिस्थितियों में, 1870 के दशक में प्रमुख अवसरों पर अंग्रेजी गीत “गॉड सेव द क्वीन” गाना अनिवार्य हो गया। 

यह सब देखकर बंकिमचंद्र को बहुत बुरा लगा। 1876 ​​​​में उन्होंने इस अंग्रेजी गीत के विकल्प के रूप में एक गीत की रचना की। गीत संस्कृत और बंगाली का मिश्रण था। प्रारंभ में इनमें से केवल दो श्लोक संस्कृत में रचे गए थे। गाने का टाइटल ‘वंदे मातरम’ था। यह गीत 1882 में आनंद मठ उपन्यास में प्रकाशित हुआ था। 

गीत को उपन्यास में भावानंद नाम के एक साधु ने गाया था। इसे यदुनाथ भट्टाचार्य ने डिजाइन किया था। अब तर्क गीत से शुरू होता है।इस गीत में बंकिमचंद्र ने भारत को दुर्गा का एक रूप माना और सभी देशवासियों को माँ की संतान माना। गीत इस बात पर जोर देता है कि बच्चों को अंधेरे और दर्द से घिरी अपनी माताओं की पूजा और रक्षा करनी चाहिए।

 अब जबकि मां को हिंदू देवी का प्रतीक माना जाता है, मुस्लिम लीग और मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग को यह पसंद नहीं आया। साथ ही, जैसा कि उल्लेख किया गया है, गीत आनंद मठ उपन्यास में प्रकाशित हुआ था और उपन्यास की पृष्ठभूमि मुस्लिम राजाओं के खिलाफ तपस्वियों के विद्रोह की घटना पर आधारित थी। उपन्यास दिखाता है कि कैसे हिंदू भिक्षुओं ने मुस्लिम शासकों को हराया। 

इसके अलावा, आनंद मठ में बंगाल के मुस्लिम राजाओं की भारी आलोचना की गई। ऐसे में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस गीत को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहते थे। जब नेहरू ने रवींद्रनाथ टैगोर से उनकी राय पूछी, तो उन्होंने कहा कि गीत की केवल पहली दो पंक्तियों को सार्वजनिक रूप से गाया जाना चाहिए। हालांकि इस गाने की रचना कई साल पहले हुई थी, लेकिन आनंद मठ के जरिए लोगों को इसका पता चला। 

यह गीत पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। 1901 में कलकत्ता में आयोजित दूसरे अधिवेशन में चरणदास ने फिर से गीत गाया। इस गीत को सरला देवी ने 1905 में बनारस के एक अधिवेशन में गाया था। भागला आंदोलन का राष्ट्रीय नारा ‘वंदे मातरम’ था। इसके अलावा स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। 

1923 में कांग्रेस के अधिवेशन में लोगों ने इस गाने का विरोध करना शुरू कर दिया। उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव की एक समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गीत के केवल दो छंद प्रासंगिक थे। 14 अगस्त 1947 की रात जब संविधान सभा की पहली बैठक ‘वंदे मातरम’ गीत से शुरू हुई और ‘जन गण मन’ के साथ समाप्त हुई।

 यह गीत 15 अगस्त 1947 को शाम 6:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर लाइव प्रसारित किया गया था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की भूमिका को देखते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में निर्णय लिया कि गीत की पहली दो दूरियों को ‘जन गण मन’ के बराबर मानयता दी जानी चाहिए।

इस बीच, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया। पांच साल बाद, 1901 में, कलकत्ता में दूसरे सम्मेलन में, श्री चरणदास ने फिर से यह गीत गाया, उसके बाद 1905 में बनारस सम्मेलन में सरलादेवी चौधरी ने यह गीत गाया। वहीं अगर बांग्ला भाषा पर विचार किया जाए तो इस गीत का शीर्षक ‘बंदे मातरम’ होना चाहिए न कि ‘वंदे मातरम’ क्योंकि ‘वंदे’ शब्द हिंदी और संस्कृत में सही है, लेकिन गीत मूल रूप से बांग्ला में लिखा गया था,  बांग्ला और बांग्ला लिपि में ‘V’ अक्षर नहीं है, इसलिए बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे ‘बंदे मातरम’ लिखा। ‘बंदे मातरम’ का संस्कृत में कोई अर्थ नहीं है और ‘वंदे मातरम’ कहने का अर्थ है ‘मैं मां की पूजा करता हूं’, इसलिए इसे देवनागरी लिपि में “वंदे मातरम’ कहा जाता था। 

विभिन्न रैलियों के दौरान आत्मा को तृप्त करने के लिए ‘वंदे मातरम’ गाया गया। जब लाला लाजपत राय ने लाहौर से ‘जर्नल’ प्रकाशित करना शुरू किया, तो उन्होंने इसका नाम वंदे मातरम रखा।

 इसके अलावा अंग्रेजों द्वारा गोली मारे गए स्वतंत्रता सेनानी मातंगिनी हाजरा की ज़ुबान पर आखिरी शब्द ‘वंदे मातरम’ था। 2002 बीबीसी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, वंदे मातरम दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत बन गया। दुनिया भर से लगभग 7000 गीतों का चयन किया गया और 155 देशों के लोगों ने सर्वेक्षण में अब तक के दस सबसे लोकप्रिय गीतों का चयन किया। सर्वे में टॉप 10 गानों में वंदे मातरम दूसरे नंबर पर रहा।

Conclusion :-

आज के इस आर्टिकल में हम ने आप को बताया वंदे मातरम History, Writer, Lyrics, Meaning in Hindi। सँस्कृत के इस गीत का हिंदी अर्थ जानने के साथ साथ हमनर बात करी कि “वंदे मातरम” गीत किस ने लिखा, इस गीत का इतिहास क्या है वगैरह। हम उम्मीद करते हैं हमारी दी हुई यह जानकारी आप के काम आई होगी। आर्टिकल अच्छा लगा हो तो दोस्तों के साथ भी शेयर करियेगा। धन्यवाद

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