अक्षर की परिभाषा, स्वरूप, प्रकार, विभाजन – बलाघात, अनुतान, संगम, उच्चारण व वर्तनी

अक्षर का परिचय: अक्षर एवं वर्ण में संबंध

यदि आपने हमारे पिछले ‘वर्ण’ के लेख को पढ़ा है, तो आपको याद होगा कि वर्ण के मौखिक या उच्चारित रूप को ‘ध्वनि’ कहते हैं, जबकि वर्ण का लिखित रूप अक्षर (Letter) कहलाता है। इस लेख में हम वर्ण के इस लिखित रूप ‘अक्षर’ की चर्चा करेंगे। आइये शुरू करते हैं!

अक्षर की परिभाषा: अक्षर किसे कहते हैं?

अक्षर का शाब्दिक अर्थ

अक्षर शब्द, एक तत्सम शब्द है अर्थात मूल रूप से यह संस्कृत भाषा का एक शब्द है। यह दो शब्दांशों से मिल कर बना है – अ (धातु का उपसर्ग) + क्षर (नष्ट होना)। अतः इसका शाब्दिक अर्थ है – अनश्वर या जिसे नष्ट न किया जा सके।

अक्षर एक अनेकर्थी शब्द है, अतः इसके भिन्न अर्थ भी हैं। जैसे – अटल, अनश्वर, ईश्वर इत्यादि।

अक्षर किसे कहते हैं?

ध्वनियों की संगठित इकाई को अक्षर कहते हैं। यह शब्दों की वह लघुतम इकाई है जिसका उच्चारण एक ही आघात (झटके) में किया जा सकता है।

अक्षर भाषा की एक मूलभूत उच्चारणात्मक इकाई है, जो वर्ण-चिह्नों के रूप में प्रयोग की जाती है। अक्षरों के संयोग से शब्दों का निर्माण होता है।

अक्षर को शब्दांश भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है किसी शब्द के वो अंश जिन्हें एक साथ बोला जाता है। हालांकि अगर आप ध्यान से देखें तो ये दोनों भिन्न भी हैं। उदाहरण के लिए ‘स्वतंत्रता’ शब्द को लेते हैं।

  • स्वतंत्रता = स्व + तंत्र + ता (ये शब्दांश भी हैं और अक्षर भी)
  • लेकिन इसमें प्रयुक्त वर्ण चिह्न ‘त’ ‘व’ इत्यादि शब्दांश नहीं वरन सिर्फ अक्षर हैं।

अक्षर के स्वरूप, स्वरूप निर्धारण और विशेषता

अक्षर का स्वरूप

  • अक्षर वर्ण-चिह्नों के स्वरूप होते हैं, अर्थात वर्णों को लिखित रूप में दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • अक्षर किसी भाषा के लिपि के इकाईयों का सांकेतिक रूप होता है।
  • अक्षरों को शब्दांशों के रूप में भी जाना जाता है। अर्थात किसी शब्द को उच्चारित करते समय शब्दों के जिन भागों को एक झटके में बोला जाता है।
  • केवल स्वर वर्ण अक्षरों से शब्दों का निर्माण नहीं होता है, इसलिए लगभग सभी शब्दों में व्यंजन अवश्य प्रयुक्त होते हैं।

अक्षर का स्वरूप निर्धारण

किसी शब्द में अक्षर का स्वरूप निर्धारण करने में दो प्रमुख तत्व शामिल होते हैं:

1) शीर्ष ध्वनि

किसी शब्द के वो भाग जिनकी ध्वनि अधिक मुखर होती है, उन्हें शीर्ष ध्वनि कहते हैं। अधिकांश शीर्ष ध्वनि, स्वर वर्ण होते हैं क्योंकि स्वर, व्यंजन वर्णों की तुलना में अधिक मुखर होते हैं।

मुखर का अर्थ है: अस्पष्ट या ज़ोर से।

2) गह्वर ध्वनि

शब्दों के वे अंश जो कम मुखर या थोड़े अस्पष्ट होते हैं, उन्हें गह्वर ध्वनि कहते हैं। ये दो तरह के होते हैं – पूर्व गह्वर और पश्च गह्वर।

उदाहरण के लिए ‘आज’ शब्द को लेते हैं:

  • आ –  शीर्ष
  • ज – गह्वर ।

अक्षर की विशेषता का वर्णन

  • अक्षर एक स्वनिम (एकल रूप, जैसे – आ, ज) भी हो सकता है और एक शब्दांश भी।
  • अक्षर भाषा का एक लिखित रूप तो है, लेकिन इसका संबंध उच्चारण पक्ष से है।
  • शब्द एक या एक से अधिक अक्षरों के हो सकते हैं। इन्हें अभी हम ‘अक्षरों के विभाजन’ के रूप में पढ़ेंगे।
  • एक से अधिक अक्षर के शब्दों के प्रत्येक अक्षर (शब्दांश) के बीच थोड़ा सा मौन होता है। इसे हम अभी ‘संगम (विराम)’ के रूप में पढ़ेंगे।

अक्षर के कितने प्रकार (भेद) होते हैं?

मूल रूप से अक्षर के प्रकार (भेद)

उच्चारण के आधार पर अक्षर को दो भेदों में वर्गीकृत किया जाता है:

1) शीर्षांत अक्षर (बद्धाअक्षर)

जिन शब्दांशों के अंत में स्वर हो, उन्हें ‘शीर्षांत अक्षर’ या ‘बद्धाअक्षर’ कहते हैं। जैसे –

  • शिवालय, तकनीक, परिवार इत्यादि।

2) गह्वरांत अक्षर (मुक्ताक्षर)

जिन शब्दांशों के अंत में व्यंजन हो, उन्हें ‘गह्वरांत अक्षर’ या ‘मुक्ताक्षर’ कहते हैं। जैसे –

  • पासा, दूधवाला, मनका इत्यादि।

हिंदी भाषा के लेखन और उच्चारण में अंतर होता है! हिंदी के अक्षरों के अंत में आने वाले ‘अ’ का उच्चारण नहीं होता है! इसका प्रयोग केवल लिखने में होता है, जिसे वर्ण-विच्छेद से समझा जा सकता है।

अक्षर का विभाजन

अक्षरों की संख्या के आधार पर अक्षर का विभाजन मुख्यतः दो रूपों में किया जाता है: एक अक्षरी और अनेक अक्षरी। लेकिन इसे भली-भांति समझने के लिए हम इसके 5 रूपों को उदाहरण सहित देखेंगे:

  • एकाक्षरी: आ, जा, ता, ला, या इत्यादि।
  • द्विअक्षरी: काया, छाया, माया इत्यादि।
  • त्रिअक्षरी: दीजिए, चलिए, चढ़ना इत्यादि।
  • चतुराक्षरी: देवरानी, कवयित्री, अधिकारी इत्यादि।
  • पंचाक्षरी: राजकुमारी, संभावनाएँ, अध्यापकों इत्यादि।

अक्षर से संबंधित कुछ मुख्य विषय

बलाघात (Accent) क्या है?

बलाघात का अर्थ है, उच्चारण के समय किसी शब्द के विशेष अक्षर या अंश को अधिक बल देना। इसका प्रभाव वाक्यों में भी देखा जा सकता है।

  • आज (आ), महाबली (महा), ताड़कासुर (ताड़का) इत्यादि।
  • अपने नौकर को बता देना कि ये काम ‘उसे ही’ करना पड़ेगा।

अनुतान (Intonation) क्या है?

किसी अक्षर, शब्द या वाक्य को बोलते समय वाचक के भावों के अनुसार सुर में उतार-चढ़ाव होते हैं, जिसे अनुतान कहते हैं।

कथन में इसे वाचक के भावों से और लेखन में इसे विराम चिह्नों से समझना पड़ता है। इसमें शब्द एक जैसे होते हैं, लेकिन अर्थ बदल जाते हैं।

उदाहरण के लिए,

  • अब ठीक लग रहा है? (हाल-चाल पूछने का भाव)
  • अब ठीक लग रहा है। (हाल बताने का संकेत)
  • अब ठीक लग रहा है न! (व्यंग का भाव)
  • क्यों अब ठीक लग रहा है न? (किसी को डाँटने का तरीका)

संगम या विराम (Confluence) क्या है?

किसी शब्द के अक्षरों या शब्दांशों के बीच के हल्के से मौन या रुकावट को ‘संगम या विराम’ कहते हैं। संगम या विराम को वाक्यों के बीच भी देखा जा सकता है, पर यहाँ हम एक शब्द के उदाहरण को देखते हैं:

  • अचानक – अ _चा_नक

वर्ण विच्छेद (वर्ण-विन्यास) एवं उच्चारण

वर्ण-विच्छेद से अक्षरों को एवं उनकी संरचनाओं को आसानी से समझा जा सकता है। इसके ज्ञान से वर्तनी की अशुद्धियों या त्रुटियों से बचा जा सकता है।

  • कर्मभूमि – क् + अ + र् + म् + अ + भ् + ऊ + म् + इ

अँग्रेजी जैसे अन्य भाषाओं की तुलना में हिन्दी के उच्चारण अधिक सटीक होते हैं। हिन्दी के प्रत्येक अक्षर या वर्ण का उच्चारण (चाहे वह किसी भी शब्द में हो) सदैव एक समान होता है।

अक्षर से संबंधित वर्तनी के कुछ प्रमुख तत्व

अनुस्वार (ं) क्या है?

कुछ शब्दों में नासिक्य वर्णों के साथ अनुस्वार का प्रयोग किया जाता है। यह किसी वर्ण या अक्षर के ऊपर एक बिंदु के रूप में होता है। जैसे –

  • संसार, चंचल, घंटी इत्यादि।

चन्द्रबिन्दु (ँ) क्या है?

अनुस्वार की तरह चन्द्र-बिंदु भी नासिका ध्वनि वाले अक्षरों के ऊपर प्रयोग की जाती है, लेकिन इनके उच्चारण में अनुस्वार की तुलना में अधिक बल दिया जाता है। 

इसकी मात्रा अर्द्ध चाँद और एक बिंदु की होती है। जैसे – जाँच, चाँद, पहुँच इत्यादि।

अर्धचन्द्राकार क्या है?

अँग्रेजी से हिन्दी में आए कुछ शब्दों के स्वर (Vowel) के उच्चारण के लिए अर्धचन्द्राकार (ऑ) की आवश्यकता होती है। इसकी ध्वनि ‘आ’ और ‘ओ’ के बीच की होती है। जैसे – ऑफिस, वॉलीबॉल, कॉलेज इत्यादि।

नुक्ता क्या है?

अरबी, फ़ारसी, उर्दू जैसे भाषाओं से हिन्दी में आए हुए शब्दों के उच्चारण एवं समान हिन्दी शब्दों से अंतर रखने के लिए उनमें नुक्ता का प्रयोग किया जाता है। जैसे –

  • राज (शासन, हिन्दी) – राज़ (रहस्य)
  • फन (सांप का फन, हिन्दी) – फ़न (कौशल, मस्ती)

अक्षर-विन्यास (वर्तनी की शुद्धता) का अर्थ एवं महत्व

वर्तनी किसे कहते हैं?

शब्दों में प्रयुक्त अक्षरों या ध्वनियों को, लिखने और बोलने के तरीके को समान रख कर, एक समान क्रम में विन्यस्त करने को वर्तनी (स्पेलिंग) कहते हैं।

अक्षर-विन्यास किसे कहते हैं?

अक्षरों के त्रुटियों को सुधारने की क्रिया को अक्षर-विन्यास कहते हैं। हिन्दी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है। इसमें किसी शब्द या अक्षर को जिस प्रकार बोला जाता है, ठीक उसी प्रकार लिखा भी जाता है।

अक्षर-विन्यास (वर्तनी) क्यों आवश्यक है?

भाषा में अक्षर-विन्यास अति महत्वपूर्ण है। इसके न होने पर विचारों की अभिव्यक्ति में त्रुटि हो जाती है, विचार अस्पष्ट हो जाता है और कई बार बातों के अर्थ बदल जाते हैं।

उदाहरण के लिए, परिणाम शब्द के केवल एक अक्षर का स्थान बदल कर देखते हैं।

  • परिणाम – निष्कर्ष, फल
  • परिमाण – माप ।

कुछ और उदाहरण:

  • निर्माण – निरमाण
  • प्रताप – परताप
  • हँसी – हंसी
  • कारण – कारन ।

निष्कर्ष

आपने देखा कि केवल कुछ अक्षरों में थोड़े से त्रुटि के कारण कितने गंभीर परिणाम हो रहे हैं। अतः, हिन्दी-भाषियों के लिए अक्षर एवं अक्षर-विन्यास का ज्ञान होना आवश्यक है।

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